आरती · Ganesha

Thal

थाळ

The Gujarati naivedya song, offering the meal to Bappa.

मारे मंदिरीए आज कीधा छे भोजनिया मन भावता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥धृ॥

स्वागतमां पुष्पोंनी माळा तैयार छे।

कमळ कळीयोथी में गूंथेलो हार छे।

आनंद आनंद थाशे हैयामां मेठा थकी पहरावता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥१॥

रूपाना बाजोटने कंचननो थाळ छे।

स्नेही भरी सामग्री सघळी तैयार छे।

एक पछी एक हुं पीरसुं माडुं आवे उछळो धरावता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥२॥

बुंदीना लाडुने मावानी धारी।

पीस्तानी बर्फी ने सेव सुवाळी।

प्रेमे आरोगजो लचपचता लाडुं थाक लाग्यो छे वाळता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥३॥

दुधीनो हलवो ने पूरणपोळी।

बे पडी रोटली ने धीमां जबोळी।

मगज मेसुब मोहनथाळ छे वार लागी छे ठारता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥४॥

शाक कर्या छे मेतो विविध जातना।

करवा वखाण शुं केसरीया भातना।

कढीने दाळ केरी वात नीराळी महक आवे छे वधारता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥५॥

जळ मारा घरनुं छे जमुनानुं जाणजो।

मुखवास करीने मांडीवात मारी माणजो।

राम भक्त घरे तमे रोज रोज आवजो थाकुं न तमने जमाडता।

व्हेलारे आवजो गणपति बाप्पा वार न लागे आवता ॥६॥

इस पाठ का Hinglish संस्करण अभी तक नहीं जोड़ा गया है।

इसे कब पढ़ा जाता है

While the naivedya is offered, after the aartis.

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