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  1. त्योहार
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गौरी हब्बा

कन्नड़

गणेश से एक दिन पहले

अगली तिथि

१४ सितंबर २०२६

सोमवार · शुक्ल तृतीया

तिथि शुरू07:08 AM · 13 Sept
तिथि समाप्त07:07 AM
इस दिन का पूरा पंचांग

परिचय

स्वर्ण गौरी व्रत, गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर देवी गौरी की पूजा।

इस दिन पड़ता है
भाद्रपद शुक्ल तृतीया, गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले

यह क्या है

स्वर्ण गौरी व्रत। गौरी अपने बेटे गणेश के उन्हें लेने आने से एक दिन पहले अपने माता-पिता के घर आती हैं, यही कारण है कि दोनों त्योहार लगातार आते हैं। विवाहित महिलाएं गौरी की मूर्ति स्थापित करती हैं, कलाई पर सोलह गांठों वाला गौरी दारा धागा बांधती हैं, और 'बागीना' प्राप्त करती हैं, जो महिलाओं के बीच दिया जाने वाला राशन का सजा हुआ सूप (छाज) है।

भोजन

ओबट्टू, चित्रान्ना, और बागीना की सामग्री, चावल, दाल, गुड़, हल्दी, चूड़ियाँ।

सामान्य प्रश्न

गौरी हब्बा, गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले क्यों होता है?
क्योंकि कथा के अनुसार गौरी अपने मायके आती हैं, और गणेश अगले दिन उन्हें वापस घर ले जाने के लिए आते हैं, इसलिए ये दोनों त्योहार जानबूझकर एक के बाद एक आते हैं। विवाहित महिलाएं गौरी की मूर्ति स्थापित करती हैं, सोलह गांठों वाला धागा बांधती हैं, और बागीना (महिलाओं द्वारा एक-दूसरे को दी जाने वाली सामग्री की टोकरी) का आदान-प्रदान करती हैं।

२०२६

  • सित१४सोमसोमवारअगलाशुक्ल तृतीयातिथि शुरू07:08 AM · 13 Septतिथि समाप्त07:07 AM

२०२७

  • सित३शुक्रशुक्रवारशुक्ल तृतीयातिथि शुरू04:50 PM · 2 Septतिथि समाप्त02:19 PM