ठंडी सप्तमी
अगली तिथि
२८ मार्च २०२७
रविवार · कृष्ण षष्ठी
देवी शीतला को समर्पित, जिन्हें चेचक (pox) और बीमारियों को रोकने वाली देवी माना जाता है। भक्त इस दिन खाना नहीं बनाते, केवल बासी (basoda) भोजन खाते हैं।
बुखार, चेचक और ठंडक से जुड़ी देवी शीतला माता की पूजा। आग नहीं जलाई जाती और कोई ताजा खाना नहीं पकाया जाता। पिछले दिन का ठंडा खाना खाया जाता है, और यहीं से यह नाम आया है। महिलाएं भोर से पहले ठंडे पानी में नहाती हैं और मंदिर में ठंडा खाना चढ़ाती हैं।
कल का पकाया हुआ खाना, जिसे ठंडा खाया जाता है। कुछ भी गर्म नहीं, कुछ भी ताजा नहीं।