ठंडी सप्तमी
देवी शीतला की पूजा, जिन्हें चेचक जैसी बीमारियों से बचाने वाला माना जाता है। भक्त ठंडा, बासी भोजन (बसौड़ा) खाते हैं।
बुखार, चेचक और ठंडक से जुड़ी देवी शीतला माता की पूजा। आग नहीं जलाई जाती और कोई ताजा खाना नहीं पकाया जाता। पिछले दिन का ठंडा खाना खाया जाता है, और यहीं से यह नाम आया है। महिलाएं भोर से पहले ठंडे पानी में नहाती हैं और मंदिर में ठंडा खाना चढ़ाती हैं।
कल का पकाया हुआ खाना, जिसे ठंडा खाया जाता है। कुछ भी गर्म नहीं, कुछ भी ताजा नहीं।