एक भक्ति गीत है जो भगवान सूर्य पर आधारित है।
श्रीसूर्यमण्डलाष्टकम्
जगत्प्रसूतिस्थितिनाशहेतवे।
विरञ्चिनारायणशङ्करात्मने॥
रत्नप्रभं तीव्रमनादिरूपम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
विप्रैः स्तुतं भावनमुक्तिकोविदम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
त्रैलोक्यपूज्यं त्रिगुणात्मरूपम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
धर्मस्य वृद्धिं कुरुते जनानाम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
यदृग्यजुः सामसु संप्रगीतम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
ज्योतिश्च कुर्यादिह मर्त्यलोके।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
प्रसिद्धमुत्पत्तिरक्षाप्रलयप्रगल्भम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
परं धाम विशुद्धतत्त्वम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
यद्योगिनां योगपथानुगम्यम्।
पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्॥
यः पठेत्सततं नरः।
सूर्यलोके महीयते॥
इति श्रीमदादित्यहृदये मण्डलाष्टकं सम्पूर्णम्
ॐ जय अदिति नन्दन।
भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन...॥
भगवान सूर्य को समर्पित सर्वाधिक प्रचलित एवं लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इस आरती का गायन भगवान सूर्यदेव की उपासना एवं दैनिक पूजन में किया जाता है।
जय सविता जय जयति दिवाकर।
सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!।
सविता हंस! सुनूर विभाकर॥
उपरोक्त स्तुति भगवान सूर्य को समर्पित सर्वाधिक प्रचलित स्तुतियों में से एक है, जिसे सूर्य चालीसा के नाम से जाना जाता है। भक्तगण इसका गायन सूर्यदेव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु करते हैं।
समरे चिन्तया स्थितम्।
युद्धाय समुपस्थितम्॥
भगवान सूर्य को समर्पित जन लोकप्रिय आदित्य हृदय स्तोत्र संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया गया है। इस विजय प्रदायक स्तोत्र की रचना अगस्त्य ऋषि ने की थी।
ॐ मित्राय नमः।
ॐ रवये नमः।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ अर्काय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
आदि नामों से युक्त सूर्यदेव की द्वादश नामावली प्रदान अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है, जिसका जाप भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त करने हेतु किया जाता है।
ॐ अरुणाय नमः।
ॐ शरण्याय नमः।
ॐ करुणारससिन्धवे नमः।
ॐ निखिलागमवेद्याय नमः।
ॐ नित्यानन्दाय नमः।
आदि नामों से युक्त भगवान सूर्य की अष्टोत्तर शतनामावली, अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है।
उक्त नामों सहित भगवान सूर्य की एक विंशति नामावली अर्थ सहित प्रदान की गयी है। देवी-देवताओं के 21 नामों के संग्रह को एक विंशति नामावली कहा जाता है।
हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार एक वर्ष में बारह संक्रातियाँ होती हैं, जिन्हें इस लेख में सूचिबद्ध किया गया है।
के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्राति के रूप में जाना जाता है। संक्राति के दिनों को दान, उपवास आदि धार्मिक कर्मों के लिये अत्यन्त शुभ एवं कल्याणकारी माना जाता है।
को समर्पित है, जो समस्त चराचर जगत को अपने तेज से प्रकाशित करते हैं। मकर संक्रान्ति को दान-पुण्य, जप-तप, स्नान, हवन-यज्ञ आदि धार्मिक गतिविधियों के लिये अत्यधिक शुभ माना जाता है।
आदि पर्व मनाये जाते हैं।
संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।
आदि दिये गये हैं, जिन्हें आप अपने प्रियजनों से साझा कर सकते हैं।
ज्ञात कर सकते हैं। थाई पोंगल को उत्तर भारतीय राज्यों में मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान सूर्य को समर्पित पर्व है।
के नाम से भी जाना जाता है।
के नाम से भी जाना जाता है। प्रस्तुत लेख में चरणबद्ध रूप से रंगीन चित्रों के माध्यम से रंगोली बनाने की विधि का वर्णन किया गया है।
प्रसीद मम भास्कर।
प्रभाकर नमोऽस्तुते॥
भगवान सूर्य को समर्पित सर्वाधिक प्रचलित श्री सूर्य अष्टकम् संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया गया है। भक्तगण सूर्यदेव को प्रसन्न करने हेतु इसका पाठ करते हैं।
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