ஸ்தோத்திரம் · Rama

Shri Rama Prema Ashtakam

श्री रामप्रेमाष्टकम् श्री राम प्रेमाष्टकम्

पर आधारित है।

श्रीरामप्रेमाष्टकम्

बन्धूकपुष्पसदृशाधरपाणिपादम्।

रामं नमामि शिरसा रमणीयवेषम्॥

पवनदमनमेकं बाणमाकृष्य तूणात्।

रणहतदनुजेन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥

दशवदनसकोपः क्षालिताशेषपापः।

विगततिमिरपङ्को रामचन्द्रः सहायः॥

कृतमुनिजनरक्ष रक्षसामे कहन्ता।

सुरनृपेन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥

सुरनरनिकराणामग्रणीर्मे रघूणाम्।

शमदमितमुनीन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥

पवनशरनिकायक्षिप्तमारीचमायः।

नयनकुमुदचन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥

कलशभववचोभिः प्राप्तमाहेन्द्रधन्वा।

लघुनिहतकपीन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥

मुनिमनुजवरेण्यः सर्ववागीशवन्द्यः।

सुरमनुजकपीन्द्रो रामचन्द्रः सहायः॥

यामुनाचार्यकृतं दिव्यं रामाष्टकमिदं शुभम्।

यः पठेत् प्रयतो भूत्वा स श्रीरामान्तिकं व्रजेत्॥

इति श्रीयामुनाचार्यकृतं श्रीरामप्रेमाष्टकं सम्पूर्णम्

श्री राम जी, भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। तत्वदर्शियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को पूर्ण परब्रह्म के रूप में वर्णित किया है। भगवान श्री राम ने रावण सहित अन्य भीषण राक्षसों का संहार किया था।

प्रस्तुत पृष्ठ पर भगवान श्री राम की अत्यन्त प्रिय एवं मधुर आरती प्रदान की गयी है। आरती पूजा का एक महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य अंग है। भगवान श्री राम जी की प्रसन्नता हेतु इस आरती का गायन किया जाता है।

श्री राम चालीसा, भगवान श्री राम को समर्पित एक चालीस चौपाईयों से युक्त अत्यन्त सुमधुर भक्तिगीत है। भगवान श्री राम की अनुपम कृपा प्राप्त करने हेतु श्री राम चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिये।

श्री रामाष्टकम् महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित भगवान श्री राम को समर्पित एक अत्यन्त लोकप्रिय स्तुति है। श्री रामाष्टकम् में श्री राम जी के विभिन्न सद्गुणों का वर्णन किया गया है। इस अष्टकम् का निष्ठापूर्वक पाठ करने से शक्ति, साहस एवं निर्भयता की प्राप्ति होती है।

गीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता।

भगवान श्रीराम को समर्पित श्री रामचन्द्राष्टकम् संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया है। राम नवमी सहित श्रीरामजी से सम्बन्धित विभिन्न अवसरों पर इस अष्टकम् का पाठ किया जाता है।

में अवतार धारण किया था। प्रस्तुत लेख में वर्तमान एवं वैदिक काल गणना के अनुसार विभिन्न तथ्यों पर विचार करते हुये भगवान श्रीराम के युग एवं जन्मतिथि का निर्धारण किया गया है।

को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दु धर्मग्रन्थों में विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित भिन्न-भिन्न गायत्री मन्त्रों का उल्लेख प्राप्त होता है।

रूप को समर्पित है।

भगवान श्री राम का ध्यान करने एवं उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु श्री राम जी के मन्त्रों का जप किया जाता है। इस पृष्ठ पर श्री राम मूल मन्त्र, राम गायत्री मन्त्र तथा राम तारक मन्त्र आदि उपलब्ध हैं। श्री राम मन्त्र का जप एवं ध्यान करने प्रभु श्री राम प्रसन्न होकर साधक का कल्याण करते हैं।

चैत्र शुक्ल नवमी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु, राजा दशरथ एवं माता कौशल्या के यहाँ श्री राम लला के रूप में प्रकट हुये थे। भगवान श्री राम के इस पावन जन्म दिवस को रामभक्तों द्वारा विश्व भर में श्री राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।

इस पृष्ठ पर भगवान श्री राम के १०८ पवित्र नाम दिये गये हैं, जिन्हें श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्री राम के १०८ नामों का नियमित पाठ करने से भक्ति एवं आनन्द की प्राप्ति होती है तथा निर्भयता का अनुभव होता है।

इस पृष्ठ पर भगवान राम के १००० पवित्र नाम दिये गये हैं, जिन्हें श्री राम सहस्रनामावली के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्री राम के १००० नामों का भक्तिपूर्वक पाठ करने से श्री राम जी के प्रति भक्ति, निष्ठा एवं प्रेम में वृद्धि होती है तथा रामभक्त श्री हनुमान जी कृपा भी प्राप्त होती है।

की प्राप्ति होती है।

नामक राजकुमार पर आधारित रमा एकादशी कथा प्रदान की गयी है। चन्द्रभागा द्वारा रमा एकादशी व्रत करने से शोभन मृत्यु के मुख से लौट आया था तथा उसे नाना प्रकार की सुख-सम्पदा प्राप्त हुयी थी।

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