पर आधारित है।
अच्युताष्टकम्
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे॥
माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्।
देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे॥
रूक्मिणीरागिणे जानकीजानये।
कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः॥
श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे।
द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक॥
दण्डकारण्यभूपुण्यताकारणः।
सम्पूजितो राघवः पातु माम्॥
केशिहा कंसह्रद्वंशिकावादकः।
बालगोपालकः पातु मां सर्वदा॥
प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम्।
लोहिताङ्घ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे॥
रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयोः।
किङ्किणीमञ्जुलं श्यामलं तं भजे॥
प्रेमतः प्रत्यहं पूरुषः सस्पृहम्।
वश्यो हरिर्जायते सत्वरम्॥
इति श्रीमच्छङ्कराचार्यकृतमच्युताष्टकं सम्पूर्णम्
का समय दिया गया है। कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के दशावतारों में से नवम अवतार थे।
भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण मन्दिरों में विशेष अनुष्ठानों एवं विशाल महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिन एक दिवसीय उपवास भी किया जाता है।
आदि विभिन्न सुन्दर चित्रों से युक्त निःशुल्क कृष्ण जन्माष्टमी ग्रीटिंग कार्ड्स, प्रियजनों को भेजने के लिये प्रदान किये गये हैं।
प्रस्तुत लेख में भगवान श्री कृष्ण की जन्मतिथि एवं उनके वैकुण्ठ गमन के समय का पञ्चाङ्ग सहित विस्तृत विश्लेषण किया गया है। भगवान कृष्ण के जन्म के समय से सम्बन्धित सभी भ्रान्तियों के निवारण हेतु उपयुक्त प्रमाण दिया गया है।
भगवान कृष्ण हिन्दु धर्म में पूजे जाने वाले सर्वाधिक लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। कृष्ण जी को भगवान विष्णु का नवम अवतार माना जाता है।
के अत्याचारों से ब्रजवासियों की रक्षा करने हेतु भगवान विष्णु, श्री कृष्ण के रूप में अवतरित हुये थे।
के नाम से भी जाना जाता है, जो सौर कैलेण्डर के आधार पर मनायी जाती है।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
बजावै मुरली मधुर बाला।
नन्द के आनन्द नन्दलाला।
यह भगवान कृष्ण को समर्पित अत्यन्त लोकप्रिय आरती है, जो वीडियो एवं हिन्दी बोल सहित प्रदान की गयी है।
ॐ कृष्णाय नमः।
ॐ कमलानाथाय नमः।
ॐ वासुदेवाय नमः।
ॐ सर्वग्रह रुपिणे नमः।
ॐ परात्पराय नमः।
श्रीकृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली के रूप में प्रसिद्ध भगवान श्रीकृष्ण के नाम व मन्त्र अर्थ एवं वीडियो सहित इस पृष्ठ पर दिये गये हैं।
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।
शजय वसुदेव देवकी नन्दन॥
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
यह भगवान कृष्ण की 40 चौपाइयों से युक्त स्तुति है, जो वीडियो एवं हिन्दी बोल सहित प्रदान की गयी है। इस स्तुति को श्रीकृष्ण चालीसा के रूप में जाना जाता है।
को अभिव्यक्त करता है।
जय हो कन्हैया लाल की।
कृष्ण जन्माष्टमी से सम्बन्धित ऐसे अनेक भक्ति प्रकट करने वाले सन्देश प्रदान किये गये हैं, जिन्हें आप अपने प्रियजनों से साझा कर सकते हैं।
सहित वर्णित किये गये हैं।
के अवसर सुन्दर रंगोली बनाने की विधि चरणबद्ध रूप से चित्रों के माध्यम से वर्णित की गयी हैं। इन चित्रों की सहायता से मनमोहक रंगोली बना सकते हैं अथवा अपने प्रियजनों को यह चित्र भेज सकते हैं।
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