સ્તોત્ર

Nama Ramayanam

नाम रामायणम्

का 7वाँ अवतार माना जाता है।

हिन्दुओं के लिये, रामायण एक महान धर्म ग्रन्थ है। व्यापक रूप से मान्यता है कि, रामायण का पाठ करने से परिवार में शान्ति एवं समृद्धि का आगमन होता है। सम्पूर्ण रामायण का पाठ करने में अनेक दिन लग सकते हैं, तथा अधिकांशतः समय के अभाव के कारण एक समय पर सम्पूर्ण रामायण का पाठ करना सम्भव नहीं होता है।

, ऋषि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रचित महाकाव्य रामायण का ही एक संक्षिप्त संस्करण है। नाम रामायणम में 108 श्लोक हैं तथा सम्पूर्ण रामायण के समान ही, नाम रामायणम में भी सात अध्याय हैं, जिन्हें बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड तथा उत्तरकाण्ड में विभाजित किया गया है।

नाम रामायणम, दक्षिण भारतीय राज्यों में अत्यधिक लोकप्रिय है।

क्रमशः तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश एवं तेलंगाना, कर्णाटक तथा केरल में अत्यधिक लोकप्रिय हैं। हिन्दी भाषी क्षेत्रों में रामचरितमानस की लोकप्रियता के कारण, उत्तर भारतीय राज्यों में नाम रामायणम् कम प्रचलित है। यह उल्लेखनीय है कि, नाम रामायण, सन्त तुलसीदास द्वारा हिन्दी भाषा की अवधी बोली में रचित रामचरितमानस का संक्षिप्त संस्करण नहीं है।

भी होती है, जिसमें सम्पूर्ण रामायण महाकाव्य को मात्र एक ही श्लोक में वर्णित किया गया है।

बालकाण्डः

शुद्धब्रह्मपरात्पर राम्॥१॥

कालात्मकपरमेश्वर राम्॥२॥

शेषतल्पसुखनिद्रित राम्॥३॥

ब्रह्माद्यामरप्रार्थित राम्॥४॥

चण्डकिरणकुलमण्डन राम्॥५॥

श्रीमद्दशरथनन्दन राम्॥६॥

कौसल्यासुखवर्धन राम्॥७॥

विश्वामित्रप्रियधन राम्॥८॥

घोरताटकाघातक राम्॥९॥

मारीचादिनिपातक राम्॥१०॥

कौशिकमखसंरक्षक राम्॥११॥

श्रीमदहल्योद्धारक राम्॥१२॥

गौतममुनिसम्पूजित राम्॥१३॥

सुरमुनिवरगणसंस्तुत राम्॥१४॥

नाविकधावितमृदुपद राम्॥१५॥

मिथिलापुरजनमोहक राम्॥१६॥

विदेहमानसरञ्जक राम्॥१७॥

त्र्यम्बककार्मुकभञ्जक राम्॥१८॥

सीतार्पितवरमालिक राम्॥१९॥

कृतवैवाहिककौतुक राम्॥२०॥

भार्गवदर्पविनाशक राम्॥२१॥

श्रीमदयोध्यापालक राम्॥२२॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

अयोध्याकाण्डः

अगणितगुणगणभूषित राम्॥२३॥

अवनीतनयाकामित राम्॥२४॥

राकाचन्द्रसमानन राम्॥२५॥

पितृवाक्याश्रितकानन राम्॥२६॥

प्रियगुहविनिवेदितपद राम्॥२७॥

तत्क्षालितनिजमृदुपद राम्॥२८॥

भरद्वाजमुखानन्दक राम्॥२९॥

चित्रकूटाद्रिनिकेतन राम्॥३०॥

दशरथसन्ततचिन्तित राम्॥३१॥

कैकेयीतनयार्थित राम्॥३२॥

विरचितनिजपितृकर्मक राम्॥३३॥

भरतार्पितनिजपादुक राम्॥३४॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

अरण्यकाण्डः

दण्डकवनजनपावन राम्॥३५॥

दुष्टविराधविनाशन राम्॥३६॥

शरभङ्गसुतीक्ष्णार्चित राम्॥३७॥

अगस्त्यानुग्रहवर्धित राम्॥३८॥

गृध्राधिपसंसेवित राम्॥३९॥

पञ्चवटीतटसुस्थित राम्॥४०॥

शूर्पणखार्तिविधायक राम्॥४१॥

खरदूषणमुखसूदक राम्॥४२॥

सीताप्रियहरिणानुग राम्॥४३॥

मारीचार्तिकृदाशुग राम्॥४४॥

विनष्टसीतान्वेषक राम्॥४५॥

गृध्राधिपगतिदायक राम्॥४६॥

शबरीदत्तफलाशन राम्॥४७॥

कबन्धबाहुच्छेदक राम्॥४८॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

किष्किन्धाकाण्डः

हनुमत्सेवितनिजपद राम्॥४९॥

नतसुग्रीवाभीष्टद राम्॥५०॥

गर्वितवालिसंहारक राम्॥५१॥

वानरदूतप्रेषक राम्॥५२॥

हितकरलक्ष्मणसंयुत राम्॥५३॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

सुन्दरकाण्डः

कपिवरसन्ततसंस्मृत राम्॥५४॥

तद्गतिविघ्नध्वंसक राम्॥५५॥

सीताप्राणाधारक राम्॥५६॥

दुष्टदशाननदूषित राम्॥५७॥

शिष्टहनूमद्भूषित राम्॥५८॥

सीतावेदितकाकावन राम्॥५९॥

कृतचूडामणिदर्शन राम्॥६०॥

कपिवरवचनाश्वासित राम्॥६१॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

युद्धकाण्डः

रावणनिधनप्रस्थित राम्॥६२॥

वानरसैन्यसमावृत राम्॥६३॥

शोषितसरिदीशार्थित राम्॥६४॥

विभीषणाभयदायक राम्॥६५॥

पर्वतसेतुनिबन्धक राम्॥६६॥

कुम्भकर्णशिरच्छेदक राम्॥६७॥

राक्षससङ्घविमर्दक राम्॥६८॥

अहिमहिरावणचारण राम्॥६९॥

संहृतदशमुखरावण राम्॥७०॥

विधिभवमुखसुरसंस्तुत राम्॥७१॥

खस्थितदशरथवीक्षित राम्॥७२॥

सीतादर्शनमोदित राम्॥७३॥

अभिषिक्तविभीषणनत राम्॥७४॥

पुष्पकयानारोहण राम्॥७५॥

भरद्वाजादिनिषेवण राम्॥७६॥

भरतप्राणप्रियकर राम्॥७७॥

साकेतपुरीभूषण राम्॥७८॥

सकलस्वीयसमानत राम्॥७९॥

रत्नलसत्पीठास्थित राम्॥८०॥

पट्टाभिषेकालङ्कृत राम्॥८१॥

पार्थिवकुलसम्मानित राम्॥८२॥

विभीषणार्पितरङ्गक राम्॥८३॥

कीशकुलानुग्रहकर राम्॥८४॥

सकलजीवसंरक्षक राम्॥८५॥

समस्तलोकाधारक राम्॥८६॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

उत्तरकाण्डः

आगतमुनिगणसंस्तुत राम्॥८७॥

विश्रुतदशकण्ठोद्भव राम्॥८८॥

सीतालिङ्गननिर्वृत राम्॥८९॥

नीतिसुरक्षितजनपद राम्॥९०॥

विपिनत्याजितजनकज राम्॥९१॥

कारितलवणासुरवध राम्॥९२॥

स्वर्गतशम्बुकसंस्तुत राम्॥९३॥

स्वतनयकुशलवनन्दित राम्॥९४॥

अश्वमेधक्रतुदीक्षित राम्॥९५॥

कालावेदितसुरपद राम्॥९६॥

आयोध्यकजनमुक्तिद राम्॥९७॥

विधिमुखविबुधानन्दक राम्॥९८॥

तेजोमयनिजरूपक राम्॥९९॥

संसृतिबन्धविमोचक राम्॥१००॥

धर्मस्थापनतत्पर राम्॥१०१॥

भक्तिपरायणमुक्तिद राम्॥१०२॥

सर्वचराचरपालक राम्॥१०३॥

सर्वभवामयवारक राम्॥१०४॥

वैकुण्ठालयसंस्थित राम्॥१०५॥

नित्यानन्दपदस्थित राम्॥१०६॥

राम् राम् जय राजा राम्॥१०७॥

राम् राम् जय सीता राम्॥१०८॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम्॥

इति नामरामायणम् सम्पूर्णम्

श्री राम जी, भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। तत्वदर्शियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को पूर्ण परब्रह्म के रूप में वर्णित किया है। भगवान श्री राम ने रावण सहित अन्य भीषण राक्षसों का संहार किया था।

में अवतार धारण किया था। प्रस्तुत लेख में वर्तमान एवं वैदिक काल गणना के अनुसार विभिन्न तथ्यों पर विचार करते हुये भगवान श्रीराम के युग एवं जन्मतिथि का निर्धारण किया गया है।

चैत्र शुक्ल नवमी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु, राजा दशरथ एवं माता कौशल्या के यहाँ श्री राम लला के रूप में प्रकट हुये थे। भगवान श्री राम के इस पावन जन्म दिवस को रामभक्तों द्वारा विश्व भर में श्री राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।

राम नवमी के दिन हिन्दु भक्तगण भगवान राम का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन अयोध्या के राजा दशरथ एवं रानी कौशल्या के घर भगवान राम का जन्म हुआ था। आगामी राम नवमी की तिथि एवं समय ज्ञात करने हेतु इस पृष्ठ का अवलोकन करें।

इस पृष्ठ पर भगवान श्री राम की विस्तृत पूजा विधि चरणबद्ध रूप से वर्णित की गयी। राम नवमी के अवसर पर प्रस्तुत षोडशोपचार पूजा विधि की सहायता से भगवान राम का पूजन सरलता से किया जा सकता है।

इस पृष्ठ पर मित्रों एवं प्रियजनों को श्री राम नवमी की शुभकामनायें भेजने हेतु आकर्षक ग्रीटिंग कार्ड्स उपलब्ध कराये गये हैं। सुन्दर चित्रों पर लिखे हुये रामनवमी के शुभकामना सन्देश को पढ़कर आपका एवं आपके प्रियजनों का मन आनन्दित हो उठेगा।

प्रस्तुत पृष्ठ पर भगवान श्री राम की अत्यन्त प्रिय एवं मधुर आरती प्रदान की गयी है। आरती पूजा का एक महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य अंग है। भगवान श्री राम जी की प्रसन्नता हेतु इस आरती का गायन किया जाता है।

यह आरती श्री रामायण जी को समर्पित है। रामायण, २४००० श्लोकों एवं ७ खण्डों से युक्त एक प्रसिद्ध हिन्दु महाकाव्य है। श्री रामायण धर्मग्रन्थ को स्वयं राम जी के ही मूर्त स्वरूप में पूजा जाता है।

श्री राम चालीसा, भगवान श्री राम को समर्पित एक चालीस चौपाईयों से युक्त अत्यन्त सुमधुर भक्तिगीत है। भगवान श्री राम की अनुपम कृपा प्राप्त करने हेतु श्री राम चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिये।

इस पृष्ठ पर भगवान श्री राम के १०८ पवित्र नाम दिये गये हैं, जिन्हें श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्री राम के १०८ नामों का नियमित पाठ करने से भक्ति एवं आनन्द की प्राप्ति होती है तथा निर्भयता का अनुभव होता है।

लीलाधर भगवान श्री विष्णु समय-समय पर सृष्टि के कल्याण हेतु नाना प्रकार के रूप धारण करते रहते हैं। भगवान विष्णु के प्रमुख दस रूपों को धर्मग्रन्थों में दशावतार के नाम से वर्णित किया गया है। धर्मग्रन्थों के अनुसार दशावतारों में से एक कल्कि अवतार वर्तमान कलयुग के अन्त में प्रकट होने वाले हैं।

भगवान श्री राम का ध्यान करने एवं उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु श्री राम जी के मन्त्रों का जप किया जाता है। इस पृष्ठ पर श्री राम मूल मन्त्र, राम गायत्री मन्त्र तथा राम तारक मन्त्र आदि उपलब्ध हैं। श्री राम मन्त्र का जप एवं ध्यान करने प्रभु श्री राम प्रसन्न होकर साधक का कल्याण करते हैं।

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