संक्रांति सत्यनारायण पूजा
इसे यह भी कहा जाता है: संक्रमण सत्यनारायण
यह पूजा उस दिन की जाती है जब सूर्य नई राशि में प्रवेश करते हैं (संक्रांति)। स्कंद पुराण में संक्रांति को इस पूजा के लिए अत्यंत प्रभावशाली दिन बताया गया है, जिससे ग्रहों की बाधाएं दूर होती हैं और घर में शुभता का वास होता है।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- सूर्य संक्रांति का दिन
- चंद्र मास
- सूर्य के राशि परिवर्तन (संक्रांति) के दिन
- देवता
- भगवान सत्यनारायण, सूर्य देव
कथा
तीसरे और चौथे अध्याय में साधु वैश्य (व्यापारी), उनकी पत्नी लीलावती और पुत्री कलावती की कथा आती है, जिन्होंने मन्नत पूरी होने पर पूजा करने में विलंब किया तो उन्हें व्यापार में भारी नुकसान और कारावास का सामना करना पड़ा, तथा पश्चाताप करने और सत्य का मान रखने पर ही उनका संकट दूर हुआ।
नियम व परंपराएं
- सुबह सूर्य देव के निमित्त दान-पुण्य और शाम को श्री सत्यनारायण की पूजा का समन्वय
- पूजा में मौसमी फल और ऋतु के नए अन्न अर्पित करना
- कृषि, व्यापार में सफलता और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करना
क्षेत्रीय विविधताएं
- दक्षिण और पश्चिम भारत में मकर संक्रांति और मेष संक्रांति के अवसर पर यह विशेष रूप से लोकप्रिय है
सामान्य प्रश्न
- क्या यह पूजा किसी भी संक्रांति पर की जा सकती है?
- हाँ। यद्यपि मकर संक्रांति सबसे प्रमुख है, फिर भी यह पूजा वर्ष की बारहों मासिक संक्रांतियों में से किसी भी दिन की जा सकती है।
श्री सत्यनारायण पूजा के प्रकार
- पूर्णिमा सत्यनारायण पूजाप्रत्येक चंद्र मास की पूर्णिमा को
- संक्रांति सत्यनारायण पूजासूर्य के राशि परिवर्तन (संक्रांति) के दिन
- नैमित्तिक सत्यनारायण पूजाअवसर पर निर्भर