है। 16 श्लोकों से युक्त यह सूक्त हिन्दु धर्म में किये जाने वाले अनेक प्रकार के धार्मिक कर्म-काण्ड एवं अनुष्ठानों का महत्त्वपूर्ण अङ्ग है।
अथ शुक्लयजुर्वेदीय पुरुषसूक्तः
हरिः ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।
स भूमिं सर्वत स्पृत्वाऽत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥
पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भाव्यम्।
उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति॥
एतावानस्य महिमातो ज्यायाँश्च पूरुषः।
पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि॥
त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवत् पुनः।
ततो विष्वङ् व्यक्रामत्साशनानशने अभि॥
ततो विराडजायत विराजो अधि पूरुषः।
स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः॥
तस्माद्यज्ञात् सर्वहुतः सम्भृतं पृषदाज्यम्।
पशूँस्ताँश्चक्रे वायव्यानारण्या ग्राम्याश्च ये॥
तस्माद्यज्ञात् सर्वहुतः ऋचः सामानि जज्ञिरे।
छन्दांसि जज्ञिरे तस्माद्यजुस्तस्मादजायत॥
तस्मादश्वा अजायन्त ये के चोभयादतः।
गावो ह जज्ञिरे तस्मात्तस्माज्जाता अजावयः॥
तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः।
तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये॥
यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्।
मुखं किमस्यासीत् किं बाहू किमूरू पादा उच्येते॥
ब्राह्मणोऽस्य मुखमासीद्बाहू राजन्यः कृतः।
ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रो अजायत॥
चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत।
श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निरजायत॥
नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत।
पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकाँऽकल्पयन्॥
यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत।
वसन्तोऽस्यासीदाज्यं ग्रीष्म इध्मः शरद्धविः॥
सप्तास्यासन् परिधयस्त्रिः सप्त समिधः कृताः।
देवा यद्यज्ञं तन्वाना अबध्नन् पुरुषं पशुम्॥
यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्।
ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः॥
इति शुक्लयजुर्वेदीयपुरुषसूक्तं सम्पूर्णम्
भगवान विष्णु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालक और त्रिमूर्ति में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दृश्य जगत, क्षीरसागर में शयन कर रहें भगवान विष्णु का स्वप्न है। इस पृष्ठ पर आप भगवान विष्णु से सम्बन्धित बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
भगवान विष्णु के पूजन और जप में उपयोग होने वाले मन्त्रों की सूचि इस पृष्ठ पर उपलब्ध करायी गयी है। इनमें से कुछ मन्त्र पौराणिक तो कुछ वैदिक हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु के शक्तिशाली यन्त्र को भी इस पृष्ठ से देखा जा सकता है।
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ लक्ष्मीपतये नमः।
ॐ कृष्णाय नमः।
ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।
ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।
आदि नामों एवं मन्त्रों से युक्त भगवान विष्णु की अष्टोत्तर शतनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है।
ॐ विश्वस्मै नमः।
ॐ विष्णवे नमः।
ॐ वषट्काराय नमः।
ॐ अक्षोभ्याय नमः।
ॐ सर्वप्रहरणायुधाय नमः।
उक्त मन्त्रों एवं नामों से युक्त भगवान विष्णु की सहस्रनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। एकादशी सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर इन मन्त्रों का जाप किया जाता है।
रंगीन चित्र के रूप में प्रदान किया गया है। भक्तगण इस यन्त्र का प्रयोग साधना हेतु करते हैं। हिन्दु धर्म में यन्त्र को साक्षात् सम्बन्धित देवी-देवता का ही स्वरूप मानकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।
भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों की सूचि और उनकी जयन्ती के दिन इस पृष्ठ पर बताये गये हैं। इस पृष्ठ से आप सभी अवतारों के विषय में रोचक जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
का ही एक रूप हैं।
भगवान सत्यनारायण के व्रत की कथा के सम्पूर्ण पाँच अध्याय, व्रत के दिन और सत्यनारायण भगवान की आरती इस पृष्ठ पर पढ़ी जा सकती है। सत्यनारायण का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को करने से अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति होती है।
द्रिकपञ्चाङ्ग पर टिप्पणी दर्ज करने के लिये गूगल अकाउंट से लॉग इन करें।