Stotra · Vishnu

Shri Hari Sharanashtakam

श्री हरि शरणाष्टकम्

एक भक्ति गीत है जो भगवान विष्णु को समर्पित है।

श्री हरि शरणाष्टकम्

शक्तिं गणेशमपरे तु दिवाकरं वै।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

नैवात्मजो न च कुलं विपुलं बलं वा।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

चास्तिकधिया न हि सेवितानि।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

चित्तं शरीरमपि रोगगणा दहन्ति।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

स्मृत्वाखिलानि ह्रदयं परिकम्पते मे।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

काकश्वसूकरजनिर्निरय च पातः।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

ब्रूयात्तवाहमिति यस्तु किलैकवारम्।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

रामायणेऽपि च पुराणकदम्बके वा।

तस्मात्त्वमेव शरणं मम दीनबन्धो॥

इति श्रीमत्परमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीहरिशरणाष्टकं सम्पूर्णम्

भगवान विष्णु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालक और त्रिमूर्ति में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दृश्य जगत, क्षीरसागर में शयन कर रहें भगवान विष्णु का स्वप्न है। इस पृष्ठ पर आप भगवान विष्णु से सम्बन्धित बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

नमो विष्णु भगवान खरारी।

कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।

त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥

श्री विष्णु चालीसा, हिन्दी बोल एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है, जिसका गायन विष्णु भक्तों द्वारा प्रतिदिन किया जाता है। 40 चौपायियों से युक्त होने कारण इसे चालीसा कहा जाता है।

प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम्।

विहितवहित्रचरित्रमखेदम्॥

केशव धृतमीनशरीर जय जगदीश हरे॥१॥

उपरोक्त श्री विष्णु दशावतार स्तोत्रम् भगवान विष्णु के दशावतारों को समर्पित अत्यन्त मधुर एवं प्रभावशाली स्तोत्रम् है। इसका पाठ करने से भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों की कृपा प्राप्त होती है।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ लक्ष्मीपतये नमः।

ॐ कृष्णाय नमः।

ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।

ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।

आदि नामों एवं मन्त्रों से युक्त भगवान विष्णु की अष्टोत्तर शतनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है।

ॐ विश्वस्मै नमः।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ वषट्काराय नमः।

ॐ अक्षोभ्याय नमः।

ॐ सर्वप्रहरणायुधाय नमः।

उक्त मन्त्रों एवं नामों से युक्त भगवान विष्णु की सहस्रनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। एकादशी सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर इन मन्त्रों का जाप किया जाता है।

विष्णु गायत्री मन्त्र, भगवान विष्णु को समर्पित लोकप्रिय मन्त्रों में से एक है। हिन्दु धर्मग्रन्थों में विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित गायत्री मन्त्र वर्णित हैं, जिनमें से एक विष्णु गायत्री मन्त्र भी है। विष्णु जी की आराधना में इस मन्त्र का प्रयोग किया जाता है।

रंगीन चित्र के रूप में प्रदान किया गया है। भक्तगण इस यन्त्र का प्रयोग साधना हेतु करते हैं। हिन्दु धर्म में यन्त्र को साक्षात् सम्बन्धित देवी-देवता का ही स्वरूप मानकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।

भगवान विष्णु के पूजन और जप में उपयोग होने वाले मन्त्रों की सूचि इस पृष्ठ पर उपलब्ध करायी गयी है। इनमें से कुछ मन्त्र पौराणिक तो कुछ वैदिक हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु के शक्तिशाली यन्त्र को भी इस पृष्ठ से देखा जा सकता है।

गरुडवाहनमम्बुजलोचनम्।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

भगवान विष्णु को समर्पित श्री कमलापति अष्टकम्, संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित दिया गया है। इस अष्टकम् का पाठ करने से भगवान विष्णु एवं देवी लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।

गणितश्रेयःपदप्रापणात्।

भगवान विष्णु को समर्पित श्री नारायण अष्टकम्, संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित दिया गया है। 8 श्लोकों से रचित होने के कारण इसे अष्टकम् कहा जाता है।

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