के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं प्रचलित अष्टकमों में से एक है। भगवान शिव से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों पर इस प्रसिद्ध अष्टकम का पाठ किया जाता है।
श्रीरुद्राष्टकम्
व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।
गुणागारसंसारपारं नतोऽहम्॥
मनोभूतकोटिप्रभाश्रीशरीरम्।
लसद्भालबालेन्दुकण्ठे भुजङ्गा॥
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥
परेशमखण्डमजं भानुकोटिप्रकाशम्।
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥
सज्जनानन्ददाता पुरारी।
प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्॥
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्।
पाहि आपन्नमामीश शम्भो॥
विप्रेण हरतोषये।
तेषां शम्भुः प्रसीदति॥
इति श्रीरामचरितमानसे उत्तरकाण्डे श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम्
प्रदान किया गया है। रुद्र गायत्री मन्त्र भगवान शिव के सर्वाधिक प्रचलित मन्त्रों में से एक है। इस मन्त्र का जाप शिव जी को प्रसन्न करने एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु किया जाता है।
दिया गया है।
आदि नामों से भी जाना जाता है।
जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
कानन कुण्डल नागफनी के॥
भगवान शिव की चालीसा वीडियो एवं हिन्दी बोल सहित प्रदान की गयी है। भगवान शिव के भक्त इस चालीसा का पाठ शिव जी को प्रसन्न करने एवं उनकी कृपा प्राप्ति हेतु करते हैं।
स्वामी जय शिव ओंकारा।
अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
भगवान शिव की आरती वीडियो एवं हिन्दी बोल सहित प्रदान की गयी है। उक्त आरती भगवान शिव को समर्पित अत्यन्त लोकप्रिय आरती है।
शंकर सुखकारी॥
सत चित आनन्दरूप।
भव! भव-भय-हारी॥
भगवान शंकर की आरती के हिन्दी बोल वीडियो सहित प्रदान किये गये हैं। भगवान शंकर हिन्दु धर्म में पूजे जाने प्रमुख तीन देवताओं में से एक हैं जिन्हें त्रिमूर्ती के रूप में जाना जाता है।
जय हर जय गिरिजाधीशा।
कृपया जगदीशा॥
ॐ हर हर हर महादेव॥
भगवान शिव को समर्पित श्री गङ्गाधर आरती के हिन्दी बोल वीडियो सहित प्रदान किये गये हैं। शिवभक्त इस आरती का गायन भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु करते हैं।
सदा विराजत कैलासी।
धरत ध्यान सुर सुखरासी॥
यहाँ भगवान कैलासवासी आरती के हिन्दी बोल वीडियो सहित प्रदान किये गये हैं। यह भगवान शिव के कैलासवासी स्वरूप को समर्पित अत्यन्त मधुर आरती है।
शिव सबके स्वामी।
अज अन्तर्यामी॥
श्री महादेव आरती वीडियो एवं हिन्दी बोल सहित प्रदान की गयी है। यह आरती भगवान शिव के महादेव स्वरूप को समर्पित अत्यन्त प्रचलित आरती है।
आदि पूजन के सभी मुख्य चरणों से युक्त शिवरात्रि षोडशोपचार पूजा विधि मन्त्र सहित प्रदान की गयी है। इस विधि की सहायता से आप विधिपूर्वक पूजन करके महा शिवरात्रि के अवसर का पूर्ण लाभ ले सकते हैं।
चित्रों से युक्त महा शिवरात्रि के ग्रीटिंग कार्ड्स निःशुल्क प्रदान किये गये हैं। इन सुन्दर चित्रों के द्वारा अपने प्रियजनों को महा शिवरात्रि की शुभकामनायें दे सकते हैं।
को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। भगवान शिव के भक्त इस अवसर पर एक दिवसीय व्रत का पालन करते हैं।
श्रावण मास में पड़ने वाले सभी सोमवार भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिये, उपवास के लिये अत्यधिक शुभ माने जाते हैं और इन्हें श्रावण सोमवार के नाम से जाना जाता है। अधिकांश राज्य, क्षेत्रीय कैलेण्डर का पालन करते हैं, जिसके कारण सावन सोमवार के दिनों में 2 सप्ताह का अन्तर हो सकता है।
के एक या दो दिन पश्चात् आरम्भ होता है।
प्रस्तुत लेख में विभिन्न प्रकार की भगवान शिव की रंगोली एवं शिवलिङ्ग रंगोली डिज़ाइन दी गयी हैं। चित्रों के माध्यम से चरणबद्ध रूप से सुन्दर रंगोली बनाने की विधि भी वर्णित की गयी है। इन चित्रों की सहायता से सरलतापूर्वक रंगोली बनायी जा सकती है।
भगवान शिव का सबसे शक्तिशाली मन्त्र है।
, भगवान शिव का मृत्यु को हराने वाला मन्त्र है।
, भगवान शिव का रुद्र गायत्री मन्त्र है। ये सभी भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिये कुछ शक्तिशाली मन्त्र हैं।
सहित वर्णित किये गये हैं।
त्रिविधताप-निवारण हे विभो।
शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्॥
उपरोक्त शिव रामाष्टकम वीडियो एवं संस्कृत बोल सहित प्रदान किया गया है। यह भगवान शिव को समर्पित अत्यन्त मधुर एवं प्रभावशाली अष्टकम् है।
शिवो महेश्वरः शम्भुः पिनाकी शशिशेखरः।
वामदेवो विरूपाक्षः कपर्दी नीललोहितः॥
श्री शिव अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् वीडियो एवं संस्कृत बोल सहित प्रदान किया गया है। शिव भक्तों के मध्य इस स्तोत्रम् का पाठ अत्यन्त शुभ एवं मङ्गलकारी माना जाता है।
गौरीशं भज मन्दमते।
ध्येयं चित्ते शिवहरचरणम्।
भगवान शिव को समर्पित श्री गौरीशाष्टकम यहाँ संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित दिया गया है। शिव जी से सम्बन्धित अवसरों पर इस अष्टकम् का पाठ किया जाता है।
वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्॥
श्री विश्वनाथाष्टकम् भगवान शिव के विश्वनाथ रूप को समर्पित एक अत्यन्त प्रचलित अष्टकम् है। भगवान शिव से सम्बन्धित विशेष अवसरों पर इस अष्टकम् का पाठ किया जाता है।
दीप्तोज्ज्वलज्ज्वलितपिङ्गललोचनाय।
ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरदाय नमः शिवाय॥
भगवान शिव का यह जन लोकप्रिय अष्टकम् संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया गया है। इस शिवाष्टकम् की रचना श्री शङ्कराचार्य जी ने की थी।
जगन्नाथ नाथं सदानन्द भाजाम्।
शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे॥
यहाँ शिवाष्टकम् को संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित वर्णित किया गया है। यह भगवान शिव का सर्वाधिक लोकप्रिय एवं कर्णप्रिय अष्टकम् है जिसके श्रवण मात्र से ही शान्ति का अनुभव होता है।
निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्।
तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
यह भगवान शिव के लिङ्ग स्वरूप को समर्पित अत्यन्त मधुर अष्टकम् है, जिसे लिङ्गाष्टकम् के नाम से जाना जाता है। शिव आराधना में लिङ्गाष्टकम् को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
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