স্তোত্র · Vishnu

Shri Kamalapati Ashtakam

श्री कमलापति अष्टकम् श्री कमलापत्यष्टकम्

भी कहा जाता है।

श्री कमलापत्यष्टकम्

गरुडवाहनमम्बुजलोचनम्।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

विमलपीतदुकूलमनोहरम्।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

किमुत्तमतीर्थनिषेवणैः।

रे मनुजाः कमलापतिम्॥

समधिगम्य सुरैरपि वाञ्छितम्।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

हि पिता जननी न च बान्धवः।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

जगदिदं सुतरां धनयौवनम्।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

परवशं नवमार्गमलाकुलम्।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

शिवविरिञ्चिमहेन्द्रनुतं सदा।

भजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥

परमहंसजनेन समीरितम्।

व्रजति विष्णुपदं स नरो ध्रुवम्॥

इति श्रीमत्परमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीकमलापत्यष्टकं सम्पूर्णम्

भगवान विष्णु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालक और त्रिमूर्ति में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दृश्य जगत, क्षीरसागर में शयन कर रहें भगवान विष्णु का स्वप्न है। इस पृष्ठ पर आप भगवान विष्णु से सम्बन्धित बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

भगवान विष्णु के पूजन और जप में उपयोग होने वाले मन्त्रों की सूचि इस पृष्ठ पर उपलब्ध करायी गयी है। इनमें से कुछ मन्त्र पौराणिक तो कुछ वैदिक हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु के शक्तिशाली यन्त्र को भी इस पृष्ठ से देखा जा सकता है।

रंगीन चित्र के रूप में प्रदान किया गया है। भक्तगण इस यन्त्र का प्रयोग साधना हेतु करते हैं। हिन्दु धर्म में यन्त्र को साक्षात् सम्बन्धित देवी-देवता का ही स्वरूप मानकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।

भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों की सूचि और उनकी जयन्ती के दिन इस पृष्ठ पर बताये गये हैं। इस पृष्ठ से आप सभी अवतारों के विषय में रोचक जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ लक्ष्मीपतये नमः।

ॐ कृष्णाय नमः।

ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।

ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।

आदि नामों एवं मन्त्रों से युक्त भगवान विष्णु की अष्टोत्तर शतनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है।

ॐ विश्वस्मै नमः।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ वषट्काराय नमः।

ॐ अक्षोभ्याय नमः।

ॐ सर्वप्रहरणायुधाय नमः।

उक्त मन्त्रों एवं नामों से युक्त भगवान विष्णु की सहस्रनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। एकादशी सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर इन मन्त्रों का जाप किया जाता है।

का ही एक रूप हैं।

भगवान सत्यनारायण के व्रत की कथा के सम्पूर्ण पाँच अध्याय, व्रत के दिन और सत्यनारायण भगवान की आरती इस पृष्ठ पर पढ़ी जा सकती है। सत्यनारायण का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को करने से अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति होती है।

जय लक्ष्मीनारायण।

जय, जय, जय विष्णो॥

भगवान विष्णु के श्री लक्ष्मीनारायण स्वरूप को समर्पित आरती प्रदान की गयी है। इस आरती का गायन भगवान लक्ष्मीनारायण से सम्बन्धित पूजन में किया जाता है।

जयति योग ध्यानी॥

मेधवर्ण अति अनूप।

सेवत चरण सुरभूप, ज्ञानी विज्ञानी॥

भगवान विष्णु के श्री बद्रीनाथ स्वरूप को समर्पित भगवान बदरीनाथ आरती प्रदान की गयी है। भगवान बद्रीनाथ को प्रसन्न करने हेतु वैष्णव भक्त इस आरती का गायन करते हैं।

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