স্তোত্র · Vishnu

Shri Vishnu Namashtakam

श्री विष्णु नामाष्टकम् श्री विष्णुनामाष्टकम्

से सम्बन्धित अत्यन्त लोकप्रिय अष्टकम् है। श्री विष्णु नाम अष्टकम् में भगवान विष्णु के आठ पवित्र नामों का स्मरण किया गया है।

श्री विष्णुनामाष्टकम्

श्री गणेशाय नमः

हरिं सत्यं जनार्दनम्।

चैवमेतन्नामाष्टकं पठेत्॥

दारिद्र्यं तस्य नश्यति।

दुःस्वप्नः सुखदो भवेत्॥

दृढा भक्तिस्तु केशवे।

तस्मान्नित्यं पठेन्नरः॥

इति श्रीवामनपुराणे विष्णोर्नामाष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम्

भगवान विष्णु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालक और त्रिमूर्ति में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दृश्य जगत, क्षीरसागर में शयन कर रहें भगवान विष्णु का स्वप्न है। इस पृष्ठ पर आप भगवान विष्णु से सम्बन्धित बहुत सी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

भगवान विष्णु के पूजन और जप में उपयोग होने वाले मन्त्रों की सूचि इस पृष्ठ पर उपलब्ध करायी गयी है। इनमें से कुछ मन्त्र पौराणिक तो कुछ वैदिक हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु के शक्तिशाली यन्त्र को भी इस पृष्ठ से देखा जा सकता है।

रंगीन चित्र के रूप में प्रदान किया गया है। भक्तगण इस यन्त्र का प्रयोग साधना हेतु करते हैं। हिन्दु धर्म में यन्त्र को साक्षात् सम्बन्धित देवी-देवता का ही स्वरूप मानकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।

भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों की सूचि और उनकी जयन्ती के दिन इस पृष्ठ पर बताये गये हैं। इस पृष्ठ से आप सभी अवतारों के विषय में रोचक जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ लक्ष्मीपतये नमः।

ॐ कृष्णाय नमः।

ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।

ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।

आदि नामों एवं मन्त्रों से युक्त भगवान विष्णु की अष्टोत्तर शतनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है।

ॐ विश्वस्मै नमः।

ॐ विष्णवे नमः।

ॐ वषट्काराय नमः।

ॐ अक्षोभ्याय नमः।

ॐ सर्वप्रहरणायुधाय नमः।

उक्त मन्त्रों एवं नामों से युक्त भगवान विष्णु की सहस्रनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। एकादशी सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर इन मन्त्रों का जाप किया जाता है।

का ही एक रूप हैं।

भगवान सत्यनारायण के व्रत की कथा के सम्पूर्ण पाँच अध्याय, व्रत के दिन और सत्यनारायण भगवान की आरती इस पृष्ठ पर पढ़ी जा सकती है। सत्यनारायण का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को करने से अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति होती है।

जय लक्ष्मीनारायण।

जय, जय, जय विष्णो॥

भगवान विष्णु के श्री लक्ष्मीनारायण स्वरूप को समर्पित आरती प्रदान की गयी है। इस आरती का गायन भगवान लक्ष्मीनारायण से सम्बन्धित पूजन में किया जाता है।

जयति योग ध्यानी॥

मेधवर्ण अति अनूप।

सेवत चरण सुरभूप, ज्ञानी विज्ञानी॥

भगवान विष्णु के श्री बद्रीनाथ स्वरूप को समर्पित भगवान बदरीनाथ आरती प्रदान की गयी है। भगवान बद्रीनाथ को प्रसन्न करने हेतु वैष्णव भक्त इस आरती का गायन करते हैं।

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