कृष्ण जन्माष्टमी (वार्षिक)

इसे यह भी कहा जाता है: गोकुलाष्टमी, श्री कृष्ण जयंती, जन्माष्टमी

मथुरा के कारागार में रोहिणी नक्षत्र के अंतर्गत मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण के जन्म का भव्य वार्षिक उत्सव। यह पूरे दिन के उपवास, मध्यरात्रि अभिषेक, रासलीला और दही हांडी प्रतियोगिताओं के साथ मनाया जाता है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
भाद्रपद (पूर्णिमांत); श्रावण (अमावस्यांत)
देवता
भगवान श्री कृष्ण (बाल गोपाल), देवकी, वसुदेव

कथा

भागवत में वर्णन है कि कंस से रक्षा के लिए वसुदेव नवजात श्री कृष्ण को उफनती यमुना पार कराकर गोकुल ले गए थे, जहाँ शेषनाग ने अपने फनों की छत्रछाया से उन्हें सहारा दिया था।

नियम व परंपराएं

  • मध्यरात्रि तक दिन भर कठोर उपवास रखना
  • सजे हुए झूले में बाल कृष्ण (लड्डू गोपाल) को झुलाना
  • पंचामृत से मध्यरात्रि अभिषेक और उसके बाद भव्य आरती
  • अगले दिन (नंदोत्सव) दही हांडी का उत्सव

क्षेत्रीय विविधताएं

  • महाराष्ट्र में दही हांडी के भव्य आयोजन; मथुरा, वृंदावन, द्वारका और गुरुवायूर के मंदिरों में मध्यरात्रि उत्सव

सामान्य प्रश्न

स्मार्त और वैष्णव जन्माष्टमी की तिथियों में कभी-कभी अंतर क्यों होता है?
स्मार्त उस दिन व्रत रखते हैं जब मध्यरात्रि (निशिता काल) में अष्टमी तिथि व्याप्त हो, जबकि वैष्णव सूर्योदय कालीन अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के संयोग को प्राथमिकता देते हैं, जिससे कभी-कभी यह पर्व अगले दिन मनाया जाता है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के प्रकार