मासिक कालाष्टमी
इसे यह भी कहा जाता है: मासिक काल अष्टमी
प्रत्येक माह आने वाला यह व्रत मन को भय, चिंता और अनुचित भटकाव से मुक्त रखता है, तथा दैनिक जीवन में दृढ़ता और धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देता है।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- चंद्र मास
- सभी 12 चंद्र महीनों में आती है
- देवता
- भगवान काल भैरव, भगवान शिव
कथा
पौराणिक शिक्षा के अनुसार, काल (समय) संपूर्ण सृष्टि को लील लेता है, और केवल वही लोग आंतरिक मुक्ति व शांति पाते हैं जो काल के स्वामी के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देते हैं।
नियम व परंपराएं
- सायंकाल में सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाना
- कालभैरवाष्टकम का पाठ करना
- काले श्वानों को दूध, रोटी अथवा भोजन खिलाना
क्षेत्रीय विविधताएं
- शैव और तांत्रिक केंद्रों में सायंकालीन मंदिर दर्शन के साथ इसे श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है
सामान्य प्रश्न
- कालाष्टमी पूजा का सबसे उत्तम समय कौन सा है?
- संध्याकाल (गोधूलि वेला) अथवा मध्यरात्रि का समय (निशीथ काल) काल भैरव की पूजा के लिए सर्वाधिक प्रभावशाली माना जाता है।
कालाष्टमी के प्रकार
- मासिक कालाष्टमीसभी 12 चंद्र महीनों में आती है
- काल भैरव जयंतीमार्गशीर्ष (पूर्णिमांत); कार्तिक (अमावस्यांत)