अखुरथ संकष्टी चतुर्थी

यह व्रत गणेश जी के अखुरथ रूप को समर्पित है, जिसका अर्थ है 'मूषक जिनका रथ है', जो आखु (मूषक) और रथ से बना है। गणेश जी का वाहन मूषक अक्सर बुद्धि द्वारा नियंत्रित चंचल इच्छा के रूप में देखा जाता है। यह उत्तर भारत की सकट चौथ यानी लंबोदर संकष्टी से ठीक पहले आने वाली संकष्टी है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
मार्गशीर्ष (अमावस्यांत); पौष (पूर्णिमांत)
देवता
भगवान गणेश (अखुरथ), चंद्र देव

कथा

एक प्रचलित कथा क्रौंच नाम के एक गंधर्व (दिव्य गायक) के बारे में बताती है, जिसे एक विशाल मूषक बनने का शाप मिला था और वह खेतों तथा आश्रमों को नुकसान पहुँचाते हुए उपद्रव मचा रहा था। गणेश जी ने उसे अपने पाश से पकड़ा, मूषक ने आत्मसमर्पण कर दिया और गणेश जी ने उसे अपना वाहन बना लिया।

नियम व परंपराएं

  • दिन भर उपवास रखना और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलना
  • भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करना
  • परिवार के साथ संकष्टी गणेश कथा सुनना

सामान्य प्रश्न

अखुरथ का क्या अर्थ है?
अखुरथ का अर्थ है 'मूषक जिनका रथ है', जो आखु (मूषक) और रथ से बना है। यह गणेश जी के नामों में से एक है।

संकष्टी चतुर्थी के प्रकार