गजानन संकष्टी चतुर्थी
इसे यह भी कहा जाता है: गजानन गणेश चतुर्थी
यह गजानन गणेश ('गजमुख स्वरूप') को समर्पित है। मुद्गल पुराण के अनुसार गजानन ने लोभासुर (लोभ और लालच का असुर) का दमन किया था। पवित्र श्रावण मास में पड़ने वाला यह व्रत शैव भक्ति को गणेश पूजा के साथ जोड़ता है।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- चंद्र मास
- आषाढ़ (अमावस्यांत); श्रावण (पूर्णिमांत)
- देवता
- भगवान गणेश (गजानन पीठ), चंद्र देव, भगवान शिव
कथा
जब लोभासुर ने समस्त प्राणियों में असीमित लालच भड़काकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब महर्षि रैभ्य ने देवताओं को गजानन गणेश की पूजा करने का उपदेश दिया। गणेश जी के दिव्य और भव्य स्वरूप को देखकर लोभासुर ने लोभ का त्याग कर दिया और धर्मात्माओं को कभी कष्ट न देने का वचन दिया।
नियम व परंपराएं
- भगवान शिव की बेलपत्र से और गणेश जी की दूर्वा से संयुक्त पूजा करना
- लोभ की भावना को मिटाने के लिए भूखों को अन्न और भोजन का दान करना
- संध्याकाल में गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना
क्षेत्रीय विविधताएं
- उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत में श्रावण सोमवार के व्रतों के साथ अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है
सामान्य प्रश्न
- इस व्रत का संबंध लोभ से मुक्ति पाने से क्यों है?
- गजानन मन की असीमित इच्छाओं और लालच को शांत करते हैं, तथा यह सिखाते हैं कि सच्चा संतोष भक्ति और बांटने में निहित है।
संकष्टी चतुर्थी के प्रकार
- लंबोदर संकष्टी चतुर्थीपौष/माघ कृष्ण चतुर्थी
- द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थीमाघ (अमावस्यांत); फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- भालचंद्र संकष्टी चतुर्थीफाल्गुन (अमावस्यांत); चैत्र (पूर्णिमांत)
- विकट संकष्टी चतुर्थीचैत्र (अमावस्यांत); वैशाख (पूर्णिमांत)
- एकदंत संकष्टी चतुर्थीवैशाख (अमावस्यांत); ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
- विभुवन संकष्टी चतुर्थीअधिक मास (केवल उन वर्षों में जिनमें अधिक मास होता है)
- कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थीज्येष्ठ (अमावस्यांत); आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- गजानन संकष्टी चतुर्थीआषाढ़ (अमावस्यांत); श्रावण (पूर्णिमांत)
- हेरंब संकष्टी चतुर्थीश्रावण (अमावस्यांत); भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- विघ्नराज संकष्टी चतुर्थीभाद्रपद (अमावस्यांत); आश्विन (पूर्णिमांत)
- वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थीआश्विन (अमावस्यांत); कार्तिक (पूर्णिमांत)
- गणाधिप संकष्टी चतुर्थीकार्तिक (अमावस्यांत); मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- अखुरथ संकष्टी चतुर्थीमार्गशीर्ष (अमावस्यांत); पौष (पूर्णिमांत)
- अंगारकी संकष्टी चतुर्थीमंगलवार, जब कृष्ण चतुर्थी का संयोग हो