कामदा एकादशी

इसे यह भी कहा जाता है: कामदा एकादशी

कामदा का अर्थ है 'इच्छाएं पूरी करने वाली।' इसकी व्रत कथा एक गंधर्व को मिले शाप और उसकी पत्नी की भक्ति पर केंद्रित है, जो उसकी मुक्ति के लिए व्रत रखती है। इसका मूल भाव किसी अन्य व्यक्ति के कल्याण के लिए धार्मिक साधना का उपयोग करना है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
शुक्ल पक्ष
चंद्र मास
चैत्र
को मनाया जाता है
शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि
देवता
भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण

कथा

प्रचलित कथा में, राजा पुंडरीक के समक्ष गायन-वादन करते समय गंधर्व ललित से एक भूल हो जाती है और उसे शाप मिल जाता है। उसकी पत्नी ललिता उसकी सहायता का उपाय खोजती है और उसे कामदा एकादशी का व्रत रखने तथा उसका पुण्य अपने पति को समर्पित करने की सलाह दी जाती है। कथा के अनुसार, उसके व्रत करने से वह शाप से मुक्त हो जाता है। अलग-अलग विवरणों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

नियम व परंपराएं

  • भक्त ललित और ललिता की कथा सुन सकते हैं, भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं और व्रत रख सकते हैं। यह प्रसंग किसी अन्य व्यक्ति के प्रति स्नेह और धार्मिक पुण्य के समर्पण पर बल देता है।

सामान्य प्रश्न

कामदा एकादशी कब मनाई जाती है?
कामदा एकादशी चैत्र के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को मनाई जाती है।

एकादशी के प्रकार