कामिका एकादशी

इसे यह भी कहा जाता है: कामिका एकादशी

कामिका एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की भक्ति, अर्पण और सच्चे मन से की गई पूजा से मिलने वाले धार्मिक पुण्य से है। जिन परंपराओं में यह प्रथा प्रचलित है, वहां व्रत कथा में विशेष रूप से भगवान विष्णु को अर्पण करने और तुलसी के प्रति श्रद्धा भाव की प्रशंसा की गई है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
श्रावण (पूर्णिमांत); आषाढ़ (अमावस्यांत)
को मनाया जाता है
कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि
देवता
भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण

कथा

कामिका एकादशी का माहात्म्य सामान्यतः एक उपदेश के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें अक्सर ब्रह्मा जी नारद जी को इस व्रत का महत्व समझाते हैं। इसमें किसी एक पात्र की कथा के बजाय पूजा और अर्पण के महत्व का वर्णन मिलता है। प्रचलित संस्करणों में इसके विवरण और उदाहरण भिन्न हो सकते हैं।

नियम व परंपराएं

  • परंपरा के अनुसार भक्त तुलसी अर्पित कर सकते हैं, भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं और कामिका एकादशी माहात्म्य सुन सकते हैं। पूजा का सटीक क्रम पारिवारिक और मंदिर की परंपरा पर निर्भर करता है।

सामान्य प्रश्न

कामिका एकादशी कब मनाई जाती है?
कामिका एकादशी श्रावण (पूर्णिमांत); आषाढ़ (अमावस्यांत) के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को मनाई जाती है।

एकादशी के प्रकार