सफला एकादशी

इसे यह भी कहा जाता है: पौष कृष्ण एकादशी

सफला का अर्थ है 'सफल' या 'फलदायी'। व्रतकथा एक सुधरे हुए पथभ्रष्ट व्यक्ति की कहानी के माध्यम से यह दर्शाती है कि निष्ठापूर्वक किया गया व्रत किसी भटके हुए व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
पौष (पूर्णिमांत); मार्गशीर्ष (अमावस्यांत)
को मनाया जाता है
कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि
देवता
भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण

कथा

सफला एकादशी की प्रचलित कथा राजा महिष्मत के भटके हुए पुत्र लुंपक के बारे में है, जिसे राज्य से निकाल दिया जाता है। जंगल में रहते हुए वह अपनी परिस्थितियों के कारण एकादशी की एक रात बिना उचित भोजन के जागकर बिताता है। कथा के अनुसार इस व्रत के पुण्य से उसका भाग्य बदल जाता है और अंततः उसका अपने राज्य से मेल-मिलाप हो जाता है। विभिन्न आख्यानों में विवरण भिन्न हो सकते हैं।

नियम व परंपराएं

  • श्रद्धालु लुंपक की कथा सुनते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपनी परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं। यह कथा आत्म-सुधार और एक नई शुरुआत की संभावना पर बल देती है।

सामान्य प्रश्न

सफला एकादशी कब मनाई जाती है?
सफला एकादशी पौष (पूर्णिमांत); मार्गशीर्ष (अमावस्यांत) के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को मनाई जाती है।

एकादशी के प्रकार