योगिनी एकादशी

इसे यह भी कहा जाता है: योगिनी एकादशी

योगिनी एकादशी का संबंध कष्टों से मुक्ति और अपने कर्तव्यों की उपेक्षा के परिणामों से माना जाता है। हेममाली की कथा इस व्रत को पश्चाताप और शाप से अस्त-व्यस्त हुए जीवन को पुनः संवारने से जोड़ती है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
आषाढ़ (पूर्णिमांत); ज्येष्ठ (अमावस्यांत)
को मनाया जाता है
कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि
देवता
भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण

कथा

हेममाली कुबेर का सेवक था, परंतु अपनी पत्नी के प्रेम में मग्न होकर वह अपने कर्तव्य की उपेक्षा कर बैठता है। कुबेर उसे शाप दे देते हैं, जिससे हेममाली को निष्कासित होकर कष्ट भोगने पड़ते हैं। अंततः वह महर्षि मार्कंडेय से मिलता है, जो उसे योगिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह देते हैं। कथा के अनुसार, इस व्रत से उसके कष्ट समाप्त हो जाते हैं और शाप का निवारण होता है। अलग-अलग विवरणों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

नियम व परंपराएं

  • भक्त हेममाली की कथा सुन सकते हैं, भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं और अपने पारंपरिक नियम के अनुसार व्रत रख सकते हैं। जब 'गौण' शब्द का प्रयोग किया जाता है, तो उसका संबंध पंचांग की तिथि से होता है, न कि किसी अलग कथा से।

सामान्य प्रश्न

योगिनी एकादशी कब मनाई जाती है?
योगिनी एकादशी आषाढ़ (पूर्णिमांत); ज्येष्ठ (अमावस्यांत) के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को मनाई जाती है।

एकादशी के प्रकार