वरुथिनी एकादशी
इसे यह भी कहा जाता है: वरुथिनी एकादशी
व्रत परंपरा में वरुथिनी का संबंध सुरक्षा, सौभाग्य और अनुचित आचरण से दूर रहने से माना जाता है। पौराणिक आख्यान मुख्य रूप से इस व्रत के धार्मिक पुण्य को समझाता है और भक्ति तथा दान के अन्य कार्यों से इसकी तुलना करता है।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- चंद्र मास
- वैशाख (पूर्णिमांत); चैत्र (अमावस्यांत)
- को मनाया जाता है
- कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि
- देवता
- भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण
कथा
ऐसी कई एकादशियों के विपरीत जिनकी प्रचलित कथाएं किसी विशिष्ट पात्र पर केंद्रित होती हैं, वरुथिनी एकादशी का माहात्म्य अक्सर एक उपदेश के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जिसमें व्रत के महत्व और भक्तों के लिए अनुशंसित आचरण का वर्णन होता है। आधुनिक कथाओं में दिए जाने वाले उदाहरणों में भिन्नता हो सकती है।
नियम व परंपराएं
- भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपने पारंपरिक नियम के अनुसार व्रत रखते हैं।
सामान्य प्रश्न
- वरुथिनी एकादशी कब मनाई जाती है?
- वरुथिनी एकादशी वैशाख (पूर्णिमांत); चैत्र (अमावस्यांत) के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को मनाई जाती है।
एकादशी के प्रकार
- उत्पन्ना एकादशीमार्गशीर्ष (पूर्णिमांत); कार्तिक (अमावस्यांत)
- मोक्षदा एकादशीमार्गशीर्ष
- सफला एकादशीपौष (पूर्णिमांत); मार्गशीर्ष (अमावस्यांत)
- पौष पुत्रदा एकादशीपौष
- षटतिला एकादशीमाघ (पूर्णिमांत); पौष (अमावस्यांत)
- जया एकादशीमाघ
- विजया एकादशीफाल्गुन (पूर्णिमांत); माघ (अमावस्यांत)
- आमलकी एकादशीफाल्गुन
- पापमोचिनी एकादशीचैत्र (पूर्णिमांत); फाल्गुन (अमावस्यांत)
- कामदा एकादशीचैत्र
- वरुथिनी एकादशीवैशाख (पूर्णिमांत); चैत्र (अमावस्यांत)
- मोहिनी एकादशीवैशाख
- अपरा एकादशीज्येष्ठ (पूर्णिमांत); वैशाख (अमावस्यांत)
- निर्जला एकादशीज्येष्ठ
- योगिनी एकादशीआषाढ़ (पूर्णिमांत); ज्येष्ठ (अमावस्यांत)
- देवशयनी एकादशीआषाढ़
- कामिका एकादशीश्रावण (पूर्णिमांत); आषाढ़ (अमावस्यांत)
- श्रावण पुत्रदा एकादशीश्रावण
- अजा एकादशीभाद्रपद (पूर्णिमांत); श्रावण (अमावस्यांत)
- परिवर्तिनी एकादशीभाद्रपद
- इंदिरा एकादशीआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- पापांकुशा एकादशीआश्विन
- रमा एकादशीकार्तिक (पूर्णिमांत); आश्विन (अमावस्यांत)
- प्रबोधिनी एकादशीकार्तिक
- पद्मिनी एकादशीअधिक मास
- परमा एकादशीअधिक मास