चतुर्थी श्राद्ध
इसे यह भी कहा जाता है: चौथ श्राद्ध
किसी भी माह के चौथे चंद्र दिवस (चतुर्थी) को दिवंगत हुए पूर्वजों को समर्पित।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- चंद्र मास
- आश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- को मनाया जाता है
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि
- देवता
- चतुर्थी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वज
कथा
शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी पर पितृ कार्य संपन्न करने से विघ्न दूर होते हैं और श्राद्ध करने वाले के परिवार में शांति आती है।
नियम व परंपराएं
- दोपहर के समय कुश और तिल से तर्पण करना
- पिंडदान के बाद पंचबलि (गाय, कौआ, कुत्ता, चींटियां, देवता)
- जरूरतमंदों को तिल और वस्त्रों का दान करना
क्षेत्रीय विविधताएं
- मानक अखिल भारतीय वैदिक श्राद्ध विधि का पालन किया जाता है
सामान्य प्रश्न
- पंचबलि क्या है?
- पंचबलि मनुष्यों के भोजन करने से पूर्व पांच जीवों को भोजन का अंश अर्पित करने की अनिवार्य विधि है: गाय (गो), कुत्ता (श्वान), कौआ (काक), चींटियां (पिपीलिका) और देवता (देव)।
पितृ पक्ष के प्रकार
- पूर्णिमा श्राद्धकृष्ण पक्ष से पूर्व पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि
- प्रतिपदा श्राद्धकृष्ण प्रतिपदा तिथि
- द्वितीया श्राद्धकृष्ण द्वितीया तिथि
- तृतीया श्राद्धकृष्ण तृतीया तिथि
- चतुर्थी श्राद्धकृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि
- भरणी श्राद्धभरणी नक्षत्र युक्त चतुर्थी या पंचमी तिथि
- पंचमी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- षष्ठी श्राद्धकृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि
- सप्तमी श्राद्धकृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि
- अष्टमी श्राद्धकृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि
- नवमी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- दशमी श्राद्धकृष्ण पक्ष की दशमी तिथि
- एकादशी श्राद्धकृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि
- द्वादशी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- त्रयोदशी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- चतुर्दशी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- सर्वपितृ अमावस्याआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)