दशमी श्राद्ध

इसे यह भी कहा जाता है: दसवीं तिथि का श्राद्ध

किसी भी पक्ष की दसवीं तिथि (दशमी) को दिवंगत हुए पूर्वजों को समर्पित।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
आश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
को मनाया जाता है
कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि
देवता
दशमी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वज

कथा

शास्त्रों में कहा गया है कि नियमित रूप से पितरों का स्मरण व सम्मान करने से गृह क्लेश दूर होते हैं और परिवार में एकता बनी रहती है।

नियम व परंपराएं

  • कुतुप और रौहिण मुहूर्त में दोपहर का तर्पण
  • पिंडदान के बाद पंचबलि कर्म
  • गायों को भोजन कराना और छाते या जूते-चप्पल का दान करना

क्षेत्रीय विविधताएं

  • मानक अखिल भारतीय वैदिक श्राद्ध विधि का पालन किया जाता है

सामान्य प्रश्न

श्राद्ध पूजा में कौन सी चीजें वर्जित हैं?
लाल फूल, (भोजन पकाने के लिए) लोहे के बर्तन, बासी पानी और अर्पित करने से पहले चखा हुआ भोजन पूरी तरह वर्जित है।

पितृ पक्ष के प्रकार