तृतीया श्राद्ध

इसे यह भी कहा जाता है: तीज श्राद्ध

शुक्ल या कृष्ण पक्ष की तीसरी तिथि (तृतीया) को दिवंगत हुए पूर्वजों को समर्पित।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
आश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
को मनाया जाता है
कृष्ण तृतीया तिथि
देवता
तृतीया तिथि को दिवंगत हुए पूर्वज

कथा

ऐसी मान्यता है कि उचित तिथि पर अर्पित किया गया जल और काले तिल पूर्वजों को तृप्ति और शांति प्रदान करते हैं।

नियम व परंपराएं

  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल मिले जल की तीन अंजलि अर्पित करना (तिल तर्पण)
  • ताजी हरी कुश घास पर पिंडदान करना
  • ब्राह्मणों को खीर, पूरी और मौसमी सब्जियों का भोजन कराना

क्षेत्रीय विविधताएं

  • मानक अखिल भारतीय वैदिक श्राद्ध विधि का पालन किया जाता है

सामान्य प्रश्न

क्या श्राद्ध में ब्राह्मणों को प्याज या लहसुन वाला भोजन दिया जा सकता है?
नहीं। श्राद्ध का भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए; इसमें प्याज, लहसुन, हींग और मांसाहारी चीजें बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

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