त्रयोदशी श्राद्ध

इसे यह भी कहा जाता है: तेरस श्राद्ध, काकबलि श्राद्ध, बालभोळानी तेरस (गुजरात)

त्रयोदशी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों को समर्पित। यह दिन विशेष रूप से दिवंगत छोटे बच्चों और शिशुओं के लिए भी नियत है। जब त्रयोदशी के दिन मघा नक्षत्र का योग बनता है, तो इस दिन की विशेष प्रशंसा की गई है: मान्यता है कि इस दिन केवल जल अर्पित करने से भी पूर्वज दीर्घकाल तक तृप्त रहते हैं।

मुख्य तथ्य

पक्ष
कृष्ण पक्ष
चंद्र मास
आश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
देवता
दिवंगत छोटे बच्चे, मघा नक्षत्र के अधिपति देवता

कथा

धार्मिक श्लोकों में कहा गया है कि इस दिन पक्षियों और गायों को भोजन कराने से बाल्यावस्था में दिवंगत हुई आत्माओं को परम शांति मिलती है।

नियम व परंपराएं

  • बच्चों के प्रिय दूध, खीर और मिठाइयों का भोग लगाना
  • विशेष रूप से काकबलि करना (कौओं को भोजन देना)
  • कुतुप मुहूर्त में दोपहर का तर्पण

क्षेत्रीय विविधताएं

  • भारत के सभी क्षेत्रों में गहन पारिवारिक संवेदना और करुणा के साथ मनाया जाता है

सामान्य प्रश्न

मघा श्राद्ध क्या है?
मघा श्राद्ध पितृ पक्ष के उस दिन किया जाता है जब मघा नक्षत्र उपस्थित रहता है। यह आमतौर पर त्रयोदशी के आसपास पड़ता है लेकिन अक्सर एक अलग दिन होता है; जब दोनों एक ही दिन पड़ते हैं, तो उस दिन का विशेष महत्व माना गया है।

पितृ पक्ष के प्रकार