षष्ठी श्राद्ध
इसे यह भी कहा जाता है: छठ श्राद्ध
किसी भी पक्ष की छठी तिथि (षष्ठी) को दिवंगत हुए पूर्वजों को समर्पित।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- चंद्र मास
- आश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- को मनाया जाता है
- कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि
- देवता
- षष्ठी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वज
कथा
शास्त्रों के अनुसार प्रतिवर्ष श्रद्धापूर्वक किया गया पितृ स्मरण कुल परंपरा की रक्षा करता है और वंशजों को अज्ञात कष्टों से बचाता है।
नियम व परंपराएं
- कुतुप मुहूर्त में दोपहर का तर्पण
- चावल और तिल के पिंड अर्पित करना
- ब्राह्मणों को भोजन कराना और जरूरतमंदों को अन्न बांटना
क्षेत्रीय विविधताएं
- मानक अखिल भारतीय वैदिक श्राद्ध विधि का पालन किया जाता है
सामान्य प्रश्न
- क्या अपार्टमेंट या किराए के घर में श्राद्ध किया जा सकता है?
- हां। एक शांत स्थान को स्वच्छ करें, दक्षिण दिशा की ओर मुख करें, भूमि पर कुश बिछाएं और सच्ची श्रद्धा के साथ श्राद्ध कर्म करें।
पितृ पक्ष के प्रकार
- पूर्णिमा श्राद्धकृष्ण पक्ष से पूर्व पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि
- प्रतिपदा श्राद्धकृष्ण प्रतिपदा तिथि
- द्वितीया श्राद्धकृष्ण द्वितीया तिथि
- तृतीया श्राद्धकृष्ण तृतीया तिथि
- चतुर्थी श्राद्धकृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि
- भरणी श्राद्धभरणी नक्षत्र युक्त चतुर्थी या पंचमी तिथि
- पंचमी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- षष्ठी श्राद्धकृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि
- सप्तमी श्राद्धकृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि
- अष्टमी श्राद्धकृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि
- नवमी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- दशमी श्राद्धकृष्ण पक्ष की दशमी तिथि
- एकादशी श्राद्धकृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि
- द्वादशी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- त्रयोदशी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- चतुर्दशी श्राद्धआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)
- सर्वपितृ अमावस्याआश्विन (पूर्णिमांत); भाद्रपद (अमावस्यांत)