आषाढ़ पूर्णिमा
इसे यह भी कहा जाता है: गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा
यह दिन गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जो महर्षि कृष्ण द्वैपायन व्यास के सम्मान में समर्पित है, जिन्होंने चारों वेदों का संकलन किया, महाभारत और अठारह महापुराणों की रचना की, तथा ब्रह्म सूत्रों की संरचना की। इस दिन शिष्य अपने आध्यात्मिक गुरुओं, आचार्यों और शिक्षकों का आदर-सत्कार करते हैं।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- चंद्र मास
- आषाढ़
- देवता
- महर्षि वेदव्यास, आध्यात्मिक गुरु, भगवान शिव (दक्षिणामूर्ति)
कथा
प्राचीन ग्रंथों में इस दिन को महर्षि व्यास की जयंती और उनके द्वारा ब्रह्म सूत्रों की रचना आरंभ करने का दिन बताया गया है। बौद्ध परंपरा में यह वह पावन दिन है जब भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन (धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त) किया था।
नियम व परंपराएं
- पादपूजा (गुरु के चरणों या चरण पादुकाओं का पूजन) करना
- आध्यात्मिक गुरुओं को पुष्प, फल और दक्षिणा अर्पित करना
- संन्यासियों और साधुओं का चार महीने के वर्षाकालीन प्रवास (चातुर्मास व्रत / वर्षावास) में औपचारिक प्रवेश
क्षेत्रीय विविधताएं
- भारत और नेपाल के सभी आश्रमों, शिक्षण संस्थानों और मठों में व्यापक रूप से मनाया जाता है
सामान्य प्रश्न
- 'गुरु' शब्द का क्या अर्थ है?
- 'गु' का अर्थ अंधकार या अज्ञान है, और 'रु' का अर्थ उसका निवारण करने वाला है। गुरु वह मार्गदर्शक हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर अंतर्मन के प्रकाश को प्रकट करते हैं।