वैशाख पूर्णिमा
इसे यह भी कहा जाता है: बुद्ध पूर्णिमा, बुद्ध जयंती, कूर्म जयंती
पूरे एशिया में वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में आदर दिया जाता है, जो गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण का स्मरण कराती है। शास्त्रीय वैष्णव परंपरा में यह कूर्म जयंती का भी दिन है, जो भगवान विष्णु के कछुआ अवतार का प्राकट्य दिवस है, जिन्होंने समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला था।
मुख्य तथ्य
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- चंद्र मास
- वैशाख
- देवता
- गौतम बुद्ध, भगवान कूर्म (विष्णु), भगवान सत्यनारायण
कथा
बौद्ध ग्रंथों के अनुसार राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने इसी रात बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे परम ज्ञान प्राप्त किया था। वहीं पुराणों में वर्णन है कि अमृत मंथन के लिए स्थिर आधार प्रदान करने हेतु भगवान विष्णु ने विशाल कूर्म रूप धारण किया था।
नियम व परंपराएं
- अहिंसा, ध्यान और शांत आत्म-चिंतन का अभ्यास करना
- बोधिवृक्ष और बौद्ध मठों के चारों ओर दीप जलाना
- जल के घड़े, छाते और ग्रीष्मकालीन शीतल पेय पदार्थों का दान करना
क्षेत्रीय विविधताएं
- बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर में भव्य तीर्थयात्राएं होती हैं, साथ ही दक्षिण भारत के वैष्णव मंदिरों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं
सामान्य प्रश्न
- वैशाख पूर्णिमा का सार्वभौमिक संदेश क्या है?
- यह मानवता को करुणा, नैतिक अनुशासन, शांति और सजगता का संदेश देती है, और बुद्ध के आत्मज्ञान तथा भगवान विष्णु के रक्षक कूर्म अवतार का सम्मान करती है।