चैत्र पूर्णिमा

इसे यह भी कहा जाता है: चैत्री पूर्णिमा, हनुमान जयंती (उत्तर/पश्चिम भारत)

चैत्र पूर्णिमा हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है। उत्तर और पश्चिम भारत में इसे हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो निःस्वार्थ सेवा, भक्ति और शक्ति के प्रतीक भगवान हनुमान के प्राकट्य का स्मरण कराती है। यह उज्ज्वल चित्रा नक्षत्र में आती है।

मुख्य तथ्य

पक्ष
शुक्ल पक्ष
चंद्र मास
चैत्र
देवता
भगवान हनुमान, भगवान सत्यनारायण, चंद्र देव

कथा

वाल्मीकि रामायण और शिव पुराण में वायु देव और भगवान शिव की कृपा से माता अंजना और केसरी के यहाँ हनुमान जी के जन्म का वर्णन मिलता है। भक्त भगवान श्री राम के प्रति उनकी निस्वार्थ भक्ति और धर्म की रक्षा में उनके योगदान का स्मरण करते हैं।

नियम व परंपराएं

  • हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ
  • हनुमान मंदिरों में सिंदूर, चमेली का तेल और लड्डू का प्रसाद चढ़ाना
  • जरूरतमंदों और भिक्षुकों को अन्न व वस्त्र का दान करना

क्षेत्रीय विविधताएं

  • महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत में इसे हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है; दक्षिण भारतीय राज्य अन्य तिथियों पर (जैसे मार्गशीर्ष या वैशाख में) हनुमान जयंती मनाते हैं

सामान्य प्रश्न

चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?
उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार, भगवान हनुमान का प्राकट्य चैत्र मास की पूर्णिमा को चित्रा नक्षत्र में हुआ था।

पूर्णिमा के प्रकार